ब्रेस्ट कैंसर (Brest Cancer) को अब तक अधिकतर लोग मिड ऐज या अधिक उम्र की महिलाओं की बीमारी मानते रहे हैं, लेकिन हाल के सालों में यह धारणा तेजी से बदल रही है. मेडिकल रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स के अनुसार, यंग महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. यह चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि पहले जहाँ यह बीमारी 40 या 50 की उम्र में देखी जाती थी, अब 20 और 30 की उम्र की महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं.
न्यूज़ 18 के मुताबिक, विजयवाड़ा स्थित मणिपाल हॉस्पिटल्स में मेडिकल ऑन्कोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट की विशेषज्ञ डॉ. श्रवण कुमार का कहना है कि इसके पीछे सिर्फ आनुवंशिकी (genetics) ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि लाइफस्टाइल की आदतें, खानपान, फिजिकल एक्टिविटी और मानसिक तनाव जैसे कई कारण जुड़े हुए हैं. उनका मानना है कि अगर महिलाएं अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव करें, तो वे अपने ब्रेस्ट हेल्थ को बेहतर बना सकती हैं और भविष्य के कैंसर जोखिम को कम कर सकती हैं.
लाइफस्टाइल और एक्सरसाइज का असर
डॉ. श्रवण कुमार के अनुसार, बैलेंस्ड डाइट और रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है. वे कहती हैं कि शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि वजन बढ़ने से हार्मोनल असंतुलन और सूजन (inflammation) बढ़ती है, जो कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती है. वह कहती हैं, ‘यह ज़रूरी नहीं कि आप रोज़ घंटों जिम में पसीना बहाएं। सिर्फ रोज़ 30 मिनट की तेज़ चाल, योग या स्विमिंग जैसी लाइट एक्टिविटी भी बड़ा फर्क ला सकती हैं.’ रेगुलर एक्सरसाइज न केवल हार्मोनल बैलेंस बनाए रखता है बल्कि शरीर में ऑक्सीजन का फ्लो और इम्यून सिस्टम
को भी मजबूत करता है, जिससे सेल्स का स्वास्थ्य बेहतर होता है.
शराब और धूम्रपान से बढ़ता खतरा
डॉ. कुमार बताती हैं कि युवा महिलाएं अक्सर शराब और धूम्रपान के खतरों को हल्के में ले लेती हैं. वे कहती हैं, ‘लिवर शरीर में मौजूद टॉक्सिक पदार्थों को साफ करने का काम करता है, लेकिन थोड़ी सी भी शराब लिवर को कमजोर कर सकती है और एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ाकर सेल्स को नुकसान पहुंचा सकती है. वहीं, धूम्रपान इस नुकसान को कई गुना बढ़ा देता है.’ इसलिए, अगर महिलाएं अपने स्तन स्वास्थ्य को लंबे समय तक सेफ रखना चाहती हैं, तो शराब का सेवन कम करना और धूम्रपान पूरी तरह छोड़ देना बेहद ज़रूरी है. यह एक सुरक्षात्मक कदम है, जो भविष्य में बड़ी बीमारी से बचा सकता है.
क्या खाएं और क्या नहीं?
डॉ. श्रवण कुमार बताती हैं कि आपका खाना ही आपकी सेहत की दिशा तय करता है. वह सलाह देती हैं कि रोज़ाना के खाने में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और लीन प्रोटीन जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ (nutritious foods) शामिल करने चाहिए। ऐसे खाद्य पदार्थों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स मुक्त कणों से होने वाले नुकसान को रोकते हैं और शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं, जिससे कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं. वहीं, प्रसंस्कृत (processed) खाद्य पदार्थ, फैट, अधिक तेल-मसालेदार खाना और चीनी शरीर में सूजन बढ़ाते हैं और हार्मोनल इमबैलेंस्ड को जन्म देते हैं. डॉ. कुमार कहती हैं, ‘जितना हो सके, बाहर का खाना कम करें और घर का ताज़ा, हल्का खाना अपनाएं। यह न सिर्फ कैंसर से सुरक्षा देता है, बल्कि ओवरऑल हेल्थ को भी बेहतर बनाता है.
तनाव, नींद और मानसिक संतुलन की अहमियत
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव लगभग हर किसी की डेली रूटीन का हिस्सा बन गया है. लेकिन लगातार तनाव हार्मोनल असंतुलन को जन्म देता है, जिससे शरीर के अंदर कई तरह की जैविक गड़बड़ियां होती हैं. डॉ. कुमार बताती हैं कि तनाव का सीधा असर डिफेंस सिस्टम पर पड़ता है. अगर हम प्रॉपर नींद नहीं लेते या लगातार मानसिक दबाव में रहते हैं, तो शरीर बीमारियों के प्रति ज़्यादा सेंसिटिव हो जाता है. वह सलाह देती हैं कि रोज़ाना कुछ समय अपने लिए निकालें गहरी सांसों के एक्सरसाइज, मेडिटेशन, जर्नलिंग या नेचर में समय बिताना तनाव कम करने के सरल लेकिन प्रभावी तरीके हैं. साथ ही, 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना भी बेहद ज़रूरी है, ताकि शरीर खुद को रिपेयर कर सके और हार्मोनल बैलेंस्ड बना रहे.
सतर्कता और शुरुआती जांच का महत्व
डॉ. श्रवण कुमार के अनुसार, ‘हालांकि 40 साल से कम उम्र की महिलाओं के लिए रेगुलर मैमोग्राफी की सलाह नहीं दी जाती, फिर भी ब्रेस्ट अवेयरनेस ज़रूरी है. महिलाओं को चाहिए कि वे हर महीने खुद अपने ब्रेस्ट की जांच करें और अगर किसी तरह की गांठ, सूजन, दर्द या असामान्य बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। वे कहती हैं, ‘शुरुआती पहचान (Early Detection) ब्रेस्ट कैंसर के सफल इलाज की कुंजी है. जितना जल्दी इसका पता चलता है, उतनी ही जल्दी और प्रभावी उपचार संभव होता है.
