Women World Cup 2025 : भारत की महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है! रविवार को दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर टीम ने अपना पहला महिला विश्व कप खिताब जीत लिया. ये जीत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का पल है. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट खोकर 298 रन बनाए. जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम सिर्फ 246 रन ही बना सकी और मैच हार गई. इस शानदार जीत में सबसे बड़ा नाम रहा 21 साल की युवा खिलाड़ी शेफाली वर्मा (Shefali Sharma) का. उन्होंने न सिर्फ बल्ले से धमाकेदार बल्लेबाजी की, बल्कि गेंद से भी कमाल दिखाया.
शेफाली वर्मा की उम्र सिर्फ 21 साल है, लेकिन उनकी कहानी किसी फिल्म से कम नहीं. कुछ हफ्ते पहले तक वो विश्व कप टीम में भी नहीं थी. यहां तक कि रिजर्व खिलाड़ियों की लिस्ट में भी उनका नाम नहीं था. लेकिन किस्मत ने ऐसा करवट बदला कि वो न सिर्फ टीम में आईं, बल्कि फाइनल मैच की हीरो बन गईं. फाइनल में शेफाली ने 87 रनों की शानदार पारी खेली. उनकी बल्लेबाजी में आक्रमकता भी थी और समझदारी भी. वो सही समय पर बड़े शॉट लगाती रहीं और छोटी-छोटी गेंदों को भी रन में बदलती रही. इसी पारी की बदौलत भारत 298 रन तक पहुंच सका, जो दक्षिण अफ्रीका के लिए बहुत बड़ा लक्ष्य साबित हुआ. लेकिन शेफाली यहीं नहीं रुकी. गेंदबाजी में भी उन्होंने कमाल कर दिया. उन्होंने दो अहम विकेट लिए, जिससे दक्षिण अफ्रीका की टीम दबाव में आ गई. शेफाली ने सीएनएन न्यूज़18 को बताया, ‘एक खिलाड़ी के लिए टीम से बाहर रहना बहुत मुश्किल होता है ये आसान नहीं है लेकिन आपको खुद पर भरोसा रखना पड़ता है.’
शेफाली की जिंदगी बदल दी
टीम से बाहर होने का दर्द और वापसी की तैयारीअगस्त महीने में मुंबई में बारिश की एक दोपहर थी. चयन समिति की पूर्व अध्यक्ष नीतू डेविड ने पत्रकारों से कहा था कि शेफाली का फॉर्म अच्छा नहीं चल रहा है, इसलिए उन्हें टीम से बाहर रखा गया है. उस समय एक नई खिलाड़ी प्रतीक रावल ने शानदार प्रदर्शन करके टॉप आर्डर में अपनी जगह पक्की कर ली थी. शेफाली उस वक्त हरियाणा की तरफ से घरेलू टी20 टूर्नामेंट खेल रही थी. लेकिन सेमीफाइनल से ठीक पहले कुछ ऐसा हुआ, जिसने शेफाली की जिंदगी बदल दी. प्रतीक रावल को अचानक चोट लग गई. टीम को तुरंत एक नई खिलाड़ी की जरूरत पड़ी. शेफाली सूरत में मैच खेल रही थी. कुछ ही घंटों में उन्हें फोन आया और कहा गया, ‘तुरंत मुंबई आ जाओ!” वो रातोंरात मुंबई पहुंचीं और डीवाई पाटिल स्टेडियम में नेट प्रैक्टिस करने लगी. सेमीफाइनल से पहले शेफाली ने मीडिया से कहा था, ‘शायद भगवान ने मुझे यहां कुछ बड़ा करने के लिए भेजा है.’
फाइनल में चमकी शेफाली की बल्लेबाजी और गेंदबाजी
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में शेफाली की पारी छोटी रही. सिर्फ 5 गेंद खेलकर 10 रन बनाए वो थोड़ी उदास भी थी. लेकिन फाइनल में वो पूरी तरह तैयार थी. उन्होंने अपनी योजनाओं पर ध्यान दिया, कोच और साथी खिलाड़ियों से सलाह ली और मैदान पर उतरी. उनकी 87 रनों की पारी ने भारत को मजबूत स्कोर दिया. शानदार ड्राइव, कवर शॉट, पुल शॉट – हर तरह का शॉट खेला. वो परिपक्वता से खेलीं, जैसे सालों से विश्व कप फाइनल खेल रही हो. गेंदबाजी में भी सब हैरान रह गए, शेफाली मुख्य रूप से बल्लेबाज हैं. 30 एकदिवसीय मैचों में सिर्फ 6 बार ही उन्होंने गेंद फेंकी थी. लेकिन फाइनल में कप्तान ने उन पर भरोसा दिखाया. शेफाली ने दो अहम साझेदारियां तोड़ी उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत प्रैक्टिस करती हूं वो एक जरूरी विकेट था. मुझे खुशी है कि मैंने टीम के लिए योगदान दिया.’
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सचिन तेंदुलकर से मिलकर बढ़ा हौसला
फाइनल से पहले शेफाली को एक खास मौका मिला. उन्हें क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर से मिलने का मौका मिला. सचिन ने उनसे बात की, हौसला बढ़ाया। शेफाली ने बताया, ‘ये सबसे बड़ा मैच था सचिन सर से मिलने के बाद मेरा आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया.’ टीम का साथ और कोच का भरोसाशेफाली ने बार-बार कहा कि ये जीत सिर्फ उनकी नहीं, पूरी टीम की है. कोच, कप्तान और साथी खिलाड़ियों ने उन पर पूरा भरोसा दिखाया. सेमीफाइनल में उदास होने के बाद भी सबने उन्हें हिम्मत दी. शेफाली ने कहा, ‘मैंने खुद पर काम किया टीम ने मुझ पर विश्वास दिखाया सबने मेरी मदद की.’
