बॉलीवुड के दिग्गज स्टार धर्मेंद्र (Dharmendra) की तबीयत को लेकर पिछले कुछ दिनों से कई खबरें सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में फैल रही हैं. लोग लगातार यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी सेहत कैसी है और क्या सच में वह गंभीर रूप से बीमार हैं. इन तमाम चर्चाओं के बीच अब उनकी बेटी और एक्ट्रेस ईशा देओल ने आगे आकर इन खबरों पर विराम लगाने का काम किया है.
ईशा देओल ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट पर एक मैसेज शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि कुछ मीडिया संस्थान धर्मेंद्र के स्वास्थ्य को लेकर गलत और झूठी अफवाहें फैला रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘मेरे पापा बिल्कुल ठीक हैं’. उनकी हालत पूरी तरह स्थिर है और डॉक्टरों की देखरेख में उनमें लगातार सुधार हो रहा है. हम सभी उनसे जल्द घर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं.’
निजता का सम्मान करें
ईशा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कृपया अफवाहों पर ध्यान न दें और हमारे परिवार की निजता का सम्मान करें. उन्होंने सभी शुभचिंतकों और फैंस को धन्यवाद देते हुए कहा कि ‘पापा की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है, इसके लिए हम उन सभी का आभार व्यक्त करते हैं जो लगातार उनके लिए दुआ कर रहे हैं.’
एक सितारा जो स्टार बनने की नई मिसाल बना
एक सितारा जो स्टार बनने की नई मिसाल बना 1960 के दशक में धर्मेंद्र ‘बंदिनी’ (1963), ‘हकीकत’ (1964) और ‘अनुपमा’ (1966) जैसी अच्छी फिल्मों से बहुत मशहूर हो गए. इनमें उन्होंने गहरी भावनाएं और शांत ताकत को बहुत अच्छे से दिखाया. उनका रोमांटिक अंदाज बेमिसाल था. गहरी आवाज, भावुक आंखें और नैचुरल चार्म से वे लोगों के दिलों की धड़कन बन गए. उस समय ‘ही-मैन’ शब्द पॉपुलर नहीं था, लेकिन वे पहले से ही ऐसा थे.
कई यादगार पल दिए
1970 के शुरू में वे बॉक्स ऑफिस के बड़े स्टार बन चुके थे. एक्शन, कॉमेडी और रोमांस हर तरह की फिल्मों में वे हीरो बने. रमेश सिप्पी जैसे डायरेक्टर और अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, शर्मिला टैगोर जैसे कलाकारों के साथ काम करके उन्होंने सिनेमा के कई यादगार पल दिए. 1975 में ‘शोले’ फिल्म में वीरू का रोल करके वे अमर हो गए. यह फिल्म भारत की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है. अमिताभ के साथ उनकी दोस्ती, मजाकिया टाइमिंग, शरारती अंदाज और हेमा मालिनी के साथ प्यार भरे सीन आज भी याद आते हैं. ‘बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना’ जैसी लाइनें सुनते ही पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं और दिल गर्म हो जाता है. ‘फूल और पत्थर’ (1966) में उनका काम भी बहुत खास था. इसके लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर नॉमिनेशन मिला. ‘सत्यकाम’ (1969) को उनके सबसे अच्छे परफॉर्मेंस में से एक माना जाता है.
स्टारडम से ऊपर एक नेकदिल इंसान
स्टारडम से ऊपर एक नेकदिल इंसानइतनी बड़ी स्टारडम के बावजूद धर्मेंद्र हमेशा साधारण और जमीन से जुड़े रहे. वे अपनी विनम्रता और हंसी-मजाक के लिए मशहूर थे. अक्सर खुद पर मजाक करते थे. परिवार, सादगी और सच्ची भावनाओं की बातें खुलकर करते थे. साथ काम करने वाले कलाकार उन्हें गर्मजोशी भरा, सम्मान देने वाला और साधारण जीवन पसंद करने वाला बताते थे. इंडस्ट्री बदलती रही, लेकिन लोगों का प्यार उन्हें हमेशा मिलता रहा. हेमा मालिनी के साथ उनकी लव स्टोरी हिंदी सिनेमा की सबसे मशहूर और लंबे समय तक चलने वाली रोमांस कहानी है. स्क्रीन पर जो केमिस्ट्री थी, वही असल जिंदगी में भी आई. 1980 में उन्होंने शादी कर ली. ‘सीता और गीता’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘जुगनू’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों में साथ काम करके वे बॉलीवुड की सबसे प्यारी जोड़ी बन गए.
एक विरासत जो हमेशा जिंदा रहेगी
अपनी आखिरी उम्र में भी धर्मेंद्र काम करते रहे. बेटों के साथ ‘यमला पगला दीवाना’ फिल्म में नजर आए. उम्र को ग्रेस और ह्यूमर के साथ अपनाया. 2023 में ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ उनकी आखिरी फिल्म थी. इसमें भी उनकी स्क्रीन प्रेजेंस आकर्षक, ताकतवर और भावुक लगी. दुनिया को याद दिलाया कि वे अभी भी वही जादू रखते हैं.

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