Maharashtra State Road Transport : महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम, यानी एमएसआरटीसी, अब पैसे बचाने और खुद पर निर्भर होने के लिए सूरज की रोशनी से बिजली बनाने की तरफ बढ़ रहा है. परिवहन मंत्री और एमएसआरटीसी के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने बताया कि निगम अपने बस डिपो, वर्कशॉप, बस स्टैंड और खाली पड़ी जमीन पर सौर ऊर्जा के प्लांट लगाएगा. इस योजना से हर साल करीब 300 मेगावाट बिजली बनेगी, जिसकी कीमत लगभग 1,000 करोड़ रुपये होगी. इससे यह भारत के किसी भी राज्य परिवहन विभाग की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना बन जाएगी.
एक बैठक में, जिसमें उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. माधव कुसेकर जैसे बड़े अधिकारी मौजूद थे, सरनाईक ने कहा कि सौर ऊर्जा अपनाने से एमएसआरटीसी खुद की बिजली खुद बनाकर खर्च कम करेगा और मजबूत बनेगा.उन्होंने कहा, ‘हम एक ऐसा ‘सौर ऊर्जा केंद्र’ बना रहे हैं जो हमारी बढ़ती बिजली की जरूरत को पूरा करेगा और निगम को आर्थिक रूप से ताकतवर बनाएगा.’
हजारों इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना
अभी एमएसआरटीसी अपनी सभी जगहों पर साल भर में लगभग 15 मेगावाट बिजली इस्तेमाल करता है और इसके लिए 25 से 30 करोड़ रुपये बिजली के बिल चुकाता है. लेकिन जल्द ही हजारों इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है, जिससे बिजली की जरूरत बढ़कर 280 मेगावाट हो जाएगी. मंत्री ने कहा कि अगर सौर ऊर्जा से इतनी बिजली खुद बनाई जाए, तो हर साल 1,000 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है. अगर जरूरत पड़ी, तो सरकार की इजाजत लेकर खाली सरकारी जमीन पर कम किराए में और सौर प्लांट लगाए जाएंगे. इस काम में केंद्र और राज्य सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक मदद का भी फायदा उठाया जाएगा.
सब्सिडी की जरूरत भी घटेगी
सरनाईक ने जोर देकर कहा कि इससे सिर्फ खर्च ही नहीं कम होगा, बल्कि सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की जरूरत भी घटेगी. उन्होंने कहा, ‘सौर ऊर्जा से जो पैसे बचेंगे, उन्हें बस सेवाओं को बेहतर बनाने में लगाया जा सकता है. इससे यात्रियों को अच्छी सुविधाएं मिलेंगी और एक साफ-सुथरी, हरी-भरी परिवहन व्यवस्था बनेगी.’ जब यह सौर ऊर्जा केंद्र पूरी तरह तैयार हो जाएगा, तो एमएसआरटीसी महाराष्ट्र में टिकाऊ और साफ-सुथरे सार्वजनिक परिवहन का एक शानदार उदाहरण बन जाएगा. जहां स्वच्छ ऊर्जा और पैसे की समझदारी दोनों साथ-साथ चलेंगी.
