Dengue In Delhi NCR : दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों (एनसीआर) में इस बार डेंगू की बीमारी ने बहुत ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है. आम तौर पर डेंगू का प्रकोप बारिश के मौसम में ज्यादा होता है, क्योंकि उस समय मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है. लेकिन इस साल दिल्ली में बारिश का सीजन खत्म हो चुका है, फिर भी डेंगू (Dengue) के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. यह स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है. दिल्ली की म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (एमसीडी) हर हफ्ते स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े जारी करती है. इन आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 1136 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है. इससे दुख की बात यह है कि दो लोगों की जान भी जा चुकी है.
हाल के दिनों की रिपोर्ट्स को देखें तो सितंबर महीने में 208 नए मामले सामने आए थे. अक्टूबर में तो और ज्यादा बढ़ोतरी हुई 25 अक्टूबर तक 307 नए केस दर्ज किए गए. सिर्फ पिछले हफ्ते की बात करें तो 72 लोग डेंगू की चपेट में आए. ऐसे में दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले हर व्यक्ति को सतर्क रहना बहुत जरूरी है. डेंगू फैलाने वाले मच्छरों से खुद को और अपने परिवार को बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. आइए, अब विस्तार से समझते हैं कि डेंगू क्या है, यह कैसे फैलती है, इसके लक्षण क्या होते हैं, इलाज कैसे किया जाता है और सबसे महत्वपूर्ण – इससे बचाव के आसान उपाय क्या हैं.
डेंगू की बीमारी क्या है और यह कैसे फैलती है?
डेंगू एक तरह का वायरल बुखार है जो मच्छर के काटने से इंसानों में फैलता है. यह कोई सामान्य मच्छर नहीं होता, बल्कि खास तरह का मच्छर होता है जिसका नाम एडीज मच्छर है. यह मच्छर दिन के समय ज्यादा सक्रिय रहता है. जब कोई व्यक्ति पहले से डेंगू वायरस से संक्रमित होता है, तो यह मच्छर उसे काटकर वायरस को अपने अंदर ले लेता है. फिर यही मच्छर जब किसी स्वस्थ इंसान को काटता है, तो वायरस उसमें चला जाता है और डेंगू बुखार शुरू हो जाता है. यह बीमारी एशिया और अफ्रीका के देशों में ज्यादा पाई जाती है, क्योंकि यहां की गर्म और नम जलवायु इन मच्छरों के लिए अनुकूल होती है.
गर्भवती महिला बच के रहें
अच्छी बात यह है कि डेंगू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलती. मतलब, अगर कोई डेंगू का मरीज आपके पास खड़ा हो या छींके, तो आपको संक्रमण नहीं होगा. यह संक्रामक बीमारी नहीं है. हालांकि, एक अपवाद है अगर कोई गर्भवती महिला डेंगू से संक्रमित हो, तो वायरस उसके गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंच सकता है. डेंगू वायरस के चार अलग-अलग प्रकार होते हैं. अगर किसी को पहली बार डेंगू होता है, तो आमतौर पर लक्षण हल्के रहते हैं और शरीर खुद ही इसे ठीक कर लेता है. लेकिन अगर दूसरी बार कोई अलग प्रकार का वायरस शरीर में घुसता है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है. रिसर्च के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लगभग 40 करोड़ लोग डेंगू बुखार की चपेट में आते हैं. इनमें से ज्यादातर मामले हल्के होते हैं, लेकिन कुछ में जान का खतरा भी हो जाता है.
डेंगू बुखार के लक्षण क्या-क्या होते हैं?
डेंगू की खासियत यह है कि ज्यादातर मामलों में कोई लक्षण दिखाई ही नहीं देते. शरीर का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वायरस से लड़कर इसे खत्म कर देता है. लेकिन अगर लक्षण दिखें, तो वे मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद शुरू होते हैं और आमतौर पर 3 से 7 दिन तक रहते हैं. सबसे आम लक्षण है तेज बुखार, जो 104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच सकता है. बुखार के साथ-साथ ये समस्याएं भी हो सकती हैं.
- स्किन पर लाल दाने या रैशेज निकलना
- आंखों के पीछे तेज दर्द होना, जैसे कोई सुई चुभो रहा हो
- जी मिचलाना या उल्टी आना
- मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में असहनीय दर्द (इसे लोग ‘हड्डी तोड़ बुखार’ भी कहते हैं)
अब बात करते हैं गंभीर डेंगू की हर 20 में से करीब 1 व्यक्ति में शुरुआती लक्षण ठीक होने के बाद अचानक स्थिति बिगड़ जाती है. इसे डेंगू हेमरेजिक फीवर कहते हैं. यह बहुत खतरनाक होता है और तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है. गंभीर लक्षण आमतौर पर बुखार उतरने के 24 से 48 घंटे बाद दिखाई देते हैं. इनमें शामिल हैं-
- पेट में तेज दर्द, खासकर ऊपरी हिस्से में
- बार-बार उल्टी होना, कभी-कभी उल्टी में खून आना
- मल में खून निकलना
- नाक या मसूड़ों से खून बहना
- बहुत ज्यादा थकान महसूस होना
- बेचैनी, चिड़चिड़ापन या घबराहट
गंभीर डेंगू में प्लेटलेट्स (खून की थक्का बनाने वाली कोशिकाएं) तेजी से कम हो जाती हैं, जिससे शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग हो सकती है. यह जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें.
डेंगू का इलाज कैसे होता है?
डेंगू के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन अभी तक नहीं बनी है. इलाज का मुख्य तरीका है लक्षणों को नियंत्रित करना और शरीर को मजबूत रखना. डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर सलाह देते हैं. कुछ सामान्य उपाय ये हैं:
- पानी और तरल पदार्थ ज्यादा पिएं: डेंगू में शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिए नारियल पानी, नींबू पानी, ORS या सादा पानी खूब पिएं। इससे डिहाइड्रेशन नहीं होगा.
- पूरी तरह आराम करें: बिस्तर पर लेटें, कोई भारी काम न करें.
- दर्द और बुखार के लिए दवा: केवल पैरासिटामोल (जैसे क्रोसिन) लें। कभी भी आइबुप्रोफेन या एस्पिरिन न लें, क्योंकि ये दवाएं खून को पतला करती हैं और ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकती हैं, जो जानलेवा हो सकता है.
अगर प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाएं, तो डॉक्टर अस्पताल में भर्ती करके IV फ्लूइड या प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन कर सकते हैं। हमेशा डॉक्टर की सलाह मानें और घरेलू नुस्खों पर पूरी तरह भरोसा न करें।
डेंगू से बचाव के आसान और प्रभावी तरीके
डेंगू से बचना पूरी तरह संभव है, बशर्ते हम मच्छरों को नियंत्रित करें। क्योंकि यह बीमारी मच्छरों से फैलती है, इसलिए बचाव का फोकस मच्छरों पर होना चाहिए। यहां कुछ सरल उपाय हैं:
- मच्छरदानी का इस्तेमाल करें: सोते समय मच्छरदानी लगाकर सोएं, खासकर दिन में अगर झपकी ले रहे हैं, क्योंकि एडीज मच्छर दिन में काटता है.
- मच्छर भगाने वाली चीजें लगाएं: शरीर पर मच्छर प्रतिरोधक क्रीम, स्प्रे या लोशन (जैसे Odomos) लगाएं। घर में गुड नाइट या ऑल आउट जैसे रिपेलेंट यूज करें।
- पानी जमा न होने दें: मच्छर साफ और स्थिर पानी में अंडे देते हैं. घर के आसपास कूलर, गमले, टायर, बाल्टी या किसी बर्तन में पानी जमा न होने दें। हर हफ्ते पानी बदलें या खाली करें.
- इम्यूनिटी मजबूत रखें: संतुलित आहार लें. फल (पपीता, अनार, कीवी), हरी सब्जियां, दालें और दही खाएं. रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं. व्यायाम करें और अच्छी नींद लें.
- घर और आसपास साफ-सफाई: कचरा इकट्ठा न होने दें, नालियां साफ रखें. फोगिंग या स्प्रे करवाएं अगर इलाके में मच्छर ज्यादा हैं.
अगर हर व्यक्ति इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाए, तो डेंगू के मामले बहुत कम हो सकते हैं. दिल्ली-एनसीआर के लोग अभी सतर्क रहें, क्योंकि मौसम ठंडा होने लगा है, लेकिन मच्छर अभी भी सक्रिय हैं. अगर आपको या आपके परिवार में किसी को बुखार या ऊपर बताए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. समय पर जांच और इलाज से जान बचाई जा सकती है. स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें!.
