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Delhi Blast : सिर्फ लाल किला नहीं अयोध्या-काशी भी था निशाना, एक्टिव था स्लीपर मॉड्यूल; जानें पूरा मामला

Delhi Blast : देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में लाल किले (लाल किला) के पास एक कार में हुए भयानक विस्फोट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. यह घटना 10 नवंबर 2025 को शाम करीब 6:52 बजे हुई, जब एक ह्युंडई i20 कार हरियाणा नंबर प्लेट (HR26 CE 7674) के साथ लाल किले मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास सबहाश मार्ग पर ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी हो गई. अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिसमें कार के अंदर मौजूद कम से कम तीन लोग मारे गए और आसपास की कई गाड़ियां आग की लपटों में घिर गईं.

इस हादसे में कुल 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस घटना की गहन जांच कर रही हैं, और शुरुआती रिपोर्ट्स से लगता है कि यह एक सुनियोजित आतंकी हमला था. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे देश की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी बजा रहे हैं.

गिरफ्तार आतंकियों से मिले बड़े सुराग

अयोध्या का राम मंदिर और वाराणसी थे मुख्य निशाने परसुरक्षा एजेंसियों ने अलग-अलग जगहों से कई संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से कुछ डॉक्टर भी शामिल हैं. इनमें हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई (जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी) और डॉ. शाहीन सईद (लखनऊ की रहने वाली) प्रमुख नाम हैं. ये दोनों अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे। पूछताछ के दौरान इनसे कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. सबसे बड़ा खुलासा यह है कि आतंकियों का मॉड्यूल अयोध्या के राम मंदिर को निशाना बनाने की योजना बना रहा था. राम मंदिर, जो 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद देशभर के हिंदू श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थस्थल बन चुका है, आतंकियों की हिट लिस्ट में सबसे ऊपर था.

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‘स्लीपर मॉड्यूल’ को एक्टिवेट

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार शाहीन ने अयोध्या में एक ‘स्लीपर मॉड्यूल’ को एक्टिवेट कर दिया था. स्लीपर मॉड्यूल का मतलब होता है कि कुछ लोग लंबे समय तक सामान्य जीवन जीते हुए छिपे रहते हैं और सही समय पर हमला करने के लिए सक्रिय हो जाते हैं. इनका प्लान था कि राम मंदिर में भारी भीड़ के दौरान विस्फोटक से बड़ा धमाका करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को नुकसान पहुंचे. इसके अलावा, वाराणसी के धार्मिक स्थल भी निशाने पर थे. आतंकियों ने इन जगहों पर हमले की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और लगातार छापेमारियों ने इन योजनाओं को विफल कर दिया. अगर यह साजिश कामयाब हो जाती, तो इसका असर पूरे देश पर पड़ता, खासकर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर सवाल उठते.

साजिश का पर्दाफाश

अयोध्या में यह सब कुछ अंजाम तक पहुंचाने से ठीक पहले ही आतंकियों को पकड़ लिया गया. फरीदाबाद में छापे के दौरान विस्फोटक और हथियार बरामद हो गए, जिससे साजिश का पर्दाफाश हो गया. मार्च 2025 में भी अयोध्या राम मंदिर पर एक अलग आतंकी साजिश नाकाम हुई थी, जिसमें 19 साल के अब्दुल रहमान को गिरफ्तार किया गया था. वह पाकिस्तान की आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) से जुड़ा था और दो हैंड ग्रेनेड लेकर राम मंदिर पर हमला करने की योजना बना रहा था. अब नवंबर 2025 में यह नया मॉड्यूल उसी तरह की साजिश का हिस्सा लग रहा है.

लाल किले ब्लास्ट: हड़बड़ी में हुआ धमाका, कोई तय योजना नहीं थी?

लाल किले के पास हुए ब्लास्ट की जांच में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है. सूत्र बताते हैं कि आतंकियों की मूल योजना लाल किले पर हमला करने की नहीं थी. यह धमाका हड़बड़ी और जल्दबाजी में हो गया। विस्फोटक में कोई टाइमर, डेटोनेटर या रिमोट कंट्रोल जैसी चीजों का इस्तेमाल नहीं किया गया था. जांच एजेंसियों को लगता है कि कार में अमोनियम नाइट्रेट और फ्यूल ऑयल का मिश्रण था, जो गाड़ी की गति या किसी छोटी चिंगारी से फट गया. इससे कोई गड्ढा या शरपनेल्स (धातु के टुकड़े) नहीं मिले, जो आमतौर पर प्लान्ड बम ब्लास्ट में होते हैं. कार के मालिक तारिक (पुलवामा, जम्मू-कश्मीर का निवासी) को हिरासत में लिया गया है. पुलिस को शक है कि कार में सवार तीनों लोग आतंकी मॉड्यूल से जुड़े थे। यह ब्लास्ट शाम के व्यस्त समय पर हुआ, जब आसपास ट्रैफिक सिग्नल पर कई गाड़ियां खड़ी थी. धमाके से कार पूरी तरह जल गई, और आसपास की गाड़ियां भी प्रभावित हुईं. दिल्ली मेट्रो का लाल किला स्टेशन अगले दिन बंद रखा गया, और पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई. गृह मंत्री अमित शाह ने खुद घटनास्थल का दौरा करने और सभी पहलुओं की जांच के आदेश दिए हैं. फॉरेंसिक टीम बॉडी सैंपल्स और कार के अवशेषों की जांच कर रही है.

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अस्पताल और भीड़भाड़ वाली जगहें थे प्रमुख टारगेट

ज्यादा नुकसान का प्लानपूछताछ से एक और डरावना खुलासा हुआ है कि आतंकियों का मॉड्यूल अस्पतालों और भीड़भाड़ वाली जगहों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था. इनकी हिट लिस्ट में बड़े अस्पताल, बाजार और सार्वजनिक स्थल शामिल थे. वजह साफ थी – ज्यादा से ज्यादा लोगों को एक साथ नुकसान पहुंचाना, ताकि अफरा-तफरी मचे और देश में दहशत फैले. अस्पतालों को टारगेट करने से न सिर्फ मरीजों और स्टाफ को खतरा होता, बल्कि इमरजेंसी सेवाएं भी ठप हो जाती. यह साजिश जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से जुड़ी लग रही है, जो पहले भी पुलवामा जैसे हमलों के लिए जिम्मेदार रहे हैं. लगातार छापेमारियों के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क को उजागर करने पर जुटी हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीमों ने फरीदाबाद, कानपुर और अन्य जगहों पर रेड्स किए. इनमें से एक गुजरात के डॉक्टर को तीन पिस्तौलों और रिसिन (एक बायो-वेपन) बनाने की सामग्री के साथ पकड़ा गया. यह सामग्री घातक जहर पैदा कर सकती है. कुल मिलाकर, अब तक 9 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है.

300 किलो अमोनियम नाइट्रेट की तलाश

सबसे बड़ी चुनौतीसुरक्षा एजेंसियों के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती बची हुई 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट को बरामद करना है. यह रसायन खाद (फर्टिलाइजर) के रूप में इस्तेमाल होता है, लेकिन बम बनाने के लिए बेहद खतरनाक है. अमोनियम नाइट्रेट को फ्यूल ऑयल के साथ मिलाकर IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाए जा सकते हैं, जो बड़े धमाके पैदा करते हैं. अब तक एजेंसियां 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद कर चुकी हैं, जिसमें 350-360 किलो अमोनियम नाइट्रेट शामिल है. यह बरामदगी फरीदाबाद के धौज गांव में एक किराए के घर से हुई, जहां सूटकेसों में यह रसायन छिपाया गया था. सूत्रों के मुताबिक, कुल 3200 किलोग्राम की खेप आतंकियों के पास थी. बाकी 300 किलो अभी भी कहीं छिपा हुआ है. यह खेप बांग्लादेश के रास्ते नेपाल से भारत में लाई गई थी. किसी खाद फैक्टरी से चोरी करके यह अमोनियम नाइट्रेट हासिल किया गया. देश के कई राज्यों – दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और बिहार में छापेमारियां चल रही हैं. एजेंसियां ड्रोन, CCTV फुटेज और इंटेलिजेंस इनपुट्स का इस्तेमाल कर रही हैं. अगर यह बाकी सामग्री बरामद न हुई, तो इससे 100 मीटर तक के दायरे में धमाका हो सकता है.

आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश: अंतरराष्ट्रीय साजिश की आशंका

जांच से पता चला है कि यह मॉड्यूल पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा जैसे संगठनों से जुड़ा है. गिरफ्तार डॉक्टरों में से एक को जैश की महिलाओं की विंग स्थापित करने का टास्क मिला था. अमोनियम नाइट्रेट के अलावा, दो असॉल्ट राइफल्स, गोलियां और डेटोनेटर्स भी बरामद हुए हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा घोषित किया है, और पूरे दिल्ली-एनसीआर में हाई अलर्ट है. जम्मू-कश्मीर, यूपी और अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. यह घटना देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, लेकिन एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई ने बड़ी तबाही को टाल दिया. फैंस और आम लोग सोशल मीडिया पर सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ कर रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही पूरा नेटवर्क बेनकाब हो जाएगा और बाकी विस्फोटक बरामद हो जाएगा. देश को ऐसी साजिशों से बचाने के लिए और मजबूत इंटेलिजेंस की जरूरत है.

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