Chhath Puja 2025 : दिवाली के समापन के साथ ही पूरे देश में अब छठ पर्व की तैयारियां ज़ोरों पर हैं। यह पर्व भक्ति, अनुशासन और सूर्य उपासना का प्रतीक माना जाता है. चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व इस साल 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. छठ पूजा खास तौर पर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ इलाकों में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है.
छठ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है व्रत, जिसे मुख्य रूप से महिलाएं रखती हैं। यह 36 घंटे तक चलने वाला निर्जला यानी बिना पानी का उपवास होता है, जिसे सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित किया जाता है. यह उपवास बेहद कठिन होता है क्योंकि इसमें न केवल भोजन, बल्कि जल का भी पूरी तरह त्याग किया जाता है. इसे भक्ति, आस्था और आत्म-नियंत्रण का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. हालांकि, डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इतने लंबे समय तक पानी और भोजन न लेने से शरीर पर कुछ नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकते हैं.
उपवास के दौरान शरीर में क्या होता है?
न्यूज 18 के मुताबिक, नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस विभाग की निदेशक डॉ. सोनिया रावत बताती हैं कि अगर उपवास को सही तरीके से किया जाए, तो यह शरीर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. उनके अनुसार, ‘जब हम खाना बंद कर देते हैं, तो हमारे शरीर का पाचन तंत्र कुछ समय के लिए विश्राम की स्थिति में चला जाता है’ इससे गैस्ट्रिक जूस का उत्पादन कम हो जाता है और पाचन अंगों को आराम मिलता है. यह शरीर से टॉक्सिन्स यानी विषैले पदार्थों को निकालने में भी मदद करता है. डॉ. रावत का कहना है कि उपवास सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी लाभदायक हो सकता है. यह मन को शांत करता है और तनाव का स्तर कम करता है. लेकिन वह यह भी चेतावनी देती हैं कि अगर उपवास के दौरान पानी बिल्कुल न लिया जाए, तो यह शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है.
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क्या 36 घंटे का निर्जल उपवास स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है?
डॉ. रावत के अनुसार, हमारे शरीर को सही तरह से काम करने के लिए प्रतिदिन कम से कम 2 से 3 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। अगर कोई व्यक्ति लगातार 36 घंटे तक पानी नहीं पीता है, तो शरीर में निर्जलीकरण (Dehydration) हो सकता है. इससे सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, लो ब्लड प्रेशर, कमजोरी और गहरे रंग का पेशाब जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक निर्जलीकरण से शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी बिगड़ सकता है, जिससे दिल की धड़कन तेज़ होना, मांसपेशियों में ऐंठन या बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ लोगों को इस दौरान पेट फूलने या पाचन से जुड़ी दिक्कतें भी महसूस हो सकती हैं. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे कठिन उपवास केवल वही लोग करें जिनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक हो. साथ ही, उपवास से कुछ दिन पहले से ही पानी की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए यानी चार से पाँच दिन पहले से अधिक पानी पीना शुरू करें ताकि शरीर अच्छी तरह हाइड्रेट रहे और उपवास के दौरान डिहाइड्रेशन का खतरा कम.
किन लोगों को निर्जल उपवास से बचना चाहिए?
चिकित्सा विशेषज्ञों की राय में, कुछ बीमारियों से पीड़ित लोगों को इस तरह के लंबे उपवास से बचना चाहिए। इनमें शामिल हैं-
- मधुमेह (Diabetes) के मरीज
- उच्च या निम्न रक्तचाप वाले लोग
- हृदय रोग (Heart Disease) के मरीज
- गुर्दे की बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति
ऐसे लोगों के लिए बिना पानी और भोजन के रहना बेहद जोखिम भरा हो सकता है. इससे ब्लड शुगर अचानक गिर सकता है या ब्लड प्रेशर में तेज़ उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए, इन लोगों को उपवास रखने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श ज़रूर लेना चाहिए.
भक्ति और सावधानी दोनों ज़रूरी
छठ व्रत केवल पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और शारीरिक अनुशासन भी है. यह व्यक्ति की आस्था, आत्मबल और समर्पण की परीक्षा होती है. हालांकि यह एक बेहद पवित्र और भावनात्मक परंपरा है, लेकिन स्वास्थ्य को ध्यान में रखना उतना ही ज़रूरी है. इसलिए, अगर आप छठ पूजा का उपवास रख रहे हैं, तो पहले से अपने शरीर को पर्याप्त पानी दें, पौष्टिक भोजन करें और किसी विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लें. भक्ति का अर्थ खुद को कष्ट देना नहीं, बल्कि श्रद्धा के साथ अनुशासन का पालन करना है.
