Diwali 2025 : दिवाली रोशनी, मिठास और एकजुटता का त्योहार है लेकिन बढ़ते प्रदूषण, पटाखों के शोर और असंतुलित दिनचर्या के बीच यह समय बुजुर्गों के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है. उम्र के इस दौर में जब शरीर पहले जैसा मजबूत नहीं रहता, तब ज़रा सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी में बदल सकती है. इसलिए ज़रूरी है कि इस बार दिवाली सिर्फ जगमगाती ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से भरी हुई भी हो. दिवाली के दौरान पटाखों का धुआं, धूल और बढ़ता वायु प्रदूषण बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है. खासकर वे लोग जो डाइबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, अस्थमा या अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित हैं, उन्हें इसके अलावा सावधानी बरतनी चाहिए.
न्यूज 18 के मुताबिक, ठाणे स्थित KIMS हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अनिकेत मुले बताते हैं कि दिवाली का शोर और धुआं कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए भारी पड़ सकता है. वे कुछ आसान लेकिन ज़रूरी उपाय सुझाते हैं. पटाखों के ज़्यादा चलने के समय खिड़कियां और दरवाज़े बंद रखे. घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें ताकि अंदर की हवा साफ़ रहे. बुजुर्गों को ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीने के लिए प्रेरित करें, जिससे गले और फेफड़ों का सूखापन कम हो. कोशिश करें कि घर के अंदर ही दीप जलाएं और वहीं उत्सव मनाएं.
हृदय संबंधी समस्या
मुंबई सेंट्रल स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स की डॉ. ऋतुजा उगलमुगले का भी यही कहना है कि दिवाली का वायु प्रदूषण बुजुर्गों में श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियों को और बढ़ा देता है. वे सलाह देती हैं, ‘जिन्हें अस्थमा या दिल की समस्या है, वे पटाखों के चरम समय में घर से बाहर न निकलें. अपनी इनहेलर या जरूरी दवाएं हमेशा पास रखें।’ अगर घर में एयर प्यूरीफायर है, तो शाम के वक्त उसे जरूर चालू रखें ताकि कमरे की हवा हल्की और साफ़ बनी रहे.
त्योहार में डेली रूटिन और पोषण का ध्यान
दिवाली के जोश में अकसर बुजुर्गों की दवा और खाने का समय बिगड़ जाता है. यह उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. डॉ. उगलमुगले कहती हैं, ‘परिवार के सदस्य सुनिश्चित करें कि बुजुर्गों को समय पर खाना, पानी और दवाइयां मिलें. वह मीठे की जगह कुछ स्वास्थ्यवर्धक विकल्प सुझाती हैं- जैसे खजूर, मेवे या बिना चीनी वाली मिठाइयां इससे स्वाद भी मिलेगा और स्वास्थ्य पर कोई खतरा भी नहीं रहेगा. साथ ही, नींद और आराम का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही ज़रूरी है ताकि बुजुर्ग थकान या चिड़चिड़ेपन से बचें.
आग से सुरक्षा
दीये और मोमबत्तियां दिवाली की खूबसूरती को बढ़ाते हैं, लेकिन अगर सावधानी न रखी जाए तो आग का खतरा भी बढ़ सकता है. डॉ. अनिकेत मुले बताते हैं, ‘दीयों को हमेशा पर्दों, कुशन या ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें. अगर घर में बुजुर्ग दीये या पटाखे जलाने में भाग लेते हैं, तो उनकी निगरानी करें.’ अगर हल्की जलन या चोट हो जाए, तो उसे तुरंत ठंडे पानी से धोकर डॉक्टर से सलाह लें. पटाखों के तेज़ शोर से भी बुजुर्गों को परेशानी हो सकती है. इसलिए घर के अंदर धीमी रोशनी, लैम्प्स और इलेक्ट्रिक दीये का इस्तेमाल करें. इससे त्योहार की रौनक भी बनी रहती है और स्वास्थ्य पर असर भी नहीं पड़ता.
हर जनरेशन के लिए दिवाली बने प्यार और अपनापन का त्योहार
वरिष्ठ नागरिकों के लिए दिवाली को सुरक्षित बनाना, उसके जश्न को कम करना नहीं है बल्कि उसे और सार्थक बनाना है. घर की सजावट, पूजा, भजन, पारिवारिक डिनर या मिठाई बांटना ये सब हल्की-फुल्की गतिविधियां बुजुर्गों को एक्टिव और खुश रखती हैं. आखिरकार, दिवाली की असली चमक दीपों की रोशनी में नहीं, बल्कि परिवार के हर सदस्य के चेहरे की मुस्कान में होती है. इसलिए इस बार दिवाली ऐसे मनाएं कि हर उम्र, हर दिल और हर सांस को सुकून मिले.
