पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मैदान में अब कांग्रेस भी अपनी पूरी तरह से एंट्री कर चुकी है। पार्टी ने देर रात 48 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की, जो राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रही है। इस लिस्ट के साथ कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस बार सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक और संगठित तरीके से चुनाव लड़ना चाहती है।
बिहार चुनाव में नए चेहरे, नई सोच
पहली लिस्ट में पुराने नेताओं के साथ नए चेहरों को भी जगह दी गई है। यह रणनीति यह दिखाती है कि कांग्रेस “नई कांग्रेस, नया बिहार” का संदेश देना चाहती है।
युवा और महिला उम्मीदवारों को प्राथमिकता देकर पार्टी ने अपने आधार को व्यापक बनाने की कोशिश की है।
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन: हर वर्ग का ध्यान
बिहार की राजनीति में जाति और क्षेत्र का संतुलन हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। कांग्रेस ने इसे ध्यान में रखते हुए हर क्षेत्र और सामाजिक वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है।
सीमांचल, मगध, मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र के उम्मीदवार इस संतुलन का हिस्सा हैं। दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, ब्राह्मण, भूमिहार और अल्पसंख्यक वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट देकर पार्टी ने सामाजिक समरसता का स्पष्ट संदेश दिया है।
बिहार चुनाव में बदलाव का संदेश: “कांग्रेस के साथ”
इस बार कांग्रेस का नारा है – “बदलाव का वक्त, कांग्रेस के साथ”। यह नारा सिर्फ चुनावी टैगलाइन नहीं, बल्कि पार्टी के पुनरुद्धार और जमीनी स्तर पर मजबूती बनाने का संकेत है।
राहुल गांधी की “भारत जोड़ो यात्रा” और प्रियंका गांधी की स्थानीय बैठकों से जमीन पर पार्टी की सक्रियता मजबूत हो रही है।
गठबंधन से परे: स्वतंत्र रणनीति
कांग्रेस की पहली लिस्ट यह संकेत देती है कि पार्टी अब केवल गठबंधन पर निर्भर नहीं रहना चाहती।
लिस्ट में कई ऐसे उम्मीदवार शामिल हैं जिनकी स्थानीय पकड़ मजबूत है और जो अपनी ताकत से चुनाव जीत सकते हैं। यह कदम पार्टी के स्वतंत्र और आत्मविश्वासी दृष्टिकोण का प्रमाण है।
महिला और अल्पसंख्यक भागीदारी: समावेशी राजनीति
कांग्रेस ने महिलाओं और अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को विशेष प्राथमिकता दी है। पार्टी का लक्ष्य है कि समावेशी राजनीति के जरिए हर समुदाय को सशक्त किया जा सके।
इस दृष्टिकोण से पार्टी न केवल वोट हासिल करेगी, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की छवि भी स्थापित करेगी।
सियासत का नया सीन: क्या कांग्रेस बदल पाएगी गेम?
बिहार की राजनीति फिलहाल NDA और महागठबंधन के मजबूत कब्जे में है, लेकिन कांग्रेस की सक्रियता से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस जमीनी मुद्दों और स्थानीय भावनाओं को प्रभावी ढंग से संबोधित कर पाती है, तो वह राज्य की सत्ता समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
निष्कर्ष: बिहार चुनाव में कांग्रेस का राजनीतिक कमबैक?
पहली लिस्ट के माध्यम से कांग्रेस ने यह दिखाया है कि वह रणनीति-प्रधान, समावेशी और संगठित दृष्टिकोण के साथ बिहार में अपनी राजनीतिक दृश्यता बढ़ा रही है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस की नई ऊर्जा और रणनीति मतदाताओं को प्रभावित कर पाएगी और क्या पार्टी बिहार की बदलती राजनीतिक परिदृश्य में एक मजबूत प्रतियोगी के रूप में उभर सकती है।
