भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने हमेशा भारतीय सेना के साहस, देशभक्ति और बलिदान की कहानियों को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है. फिल्मों जैसे ‘बॉर्डर’, ‘लक्ष्य’ और ‘शेरशाह’ ने यह साबित कर दिया कि हमारे सिपाहियों की वीरता दर्शकों के दिलों को गहराई से छूती है. अब एक और प्रेरणादायक कहानी जल्द ही बड़े पर्दे पर दिखाई देने वाली है यह कहानी है सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल (Arun Khetrapal) की, जो भारत के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे. इस कहानी को निर्देशक श्रीराम राघवन अपनी अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ के ज़रिए बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी में है. फिल्म में अगस्त्य नंदा (Agastya Nanda) अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभा रहे हैं. यह फिल्म अगस्त्य के करियर की दूसरी फिल्म होगी.
इससे पहले उन्होंने जोया अख्तर की ‘द आर्चीज़’ से डिजिटल डेब्यू किया था, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई थी. लेकिन इक्कीस उनकी पहली थिएटर रिलीज़ होगी। निर्माताओं ने अरुण खेत्रपाल की जयंती के मौके पर फिल्म की शूटिंग पूरी होने की जानकारी शेयर की और एक इमोशनल मैसेज लिखा, ‘अरुण खेत्रपाल की जयंती पर ‘इक्कीस’ पूरी हो गई है. यह एक ऐसी कहानी है जो हमेशा हमारे दिलों में रहेगी.’ फिल्म को दिनेश विजान और मैडॉक फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया है. इसमें दिग्गज स्टार धर्मेंद्र, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर, श्री बिश्नोई, एकावली खन्ना और मोहन गोदारा जैसे कलाकार भी नज़र आएंगे। फिल्म दिसंबर 2025 में सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी.
कौन थे सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल?
अरुण खेत्रपाल का जन्म पुणे में हुआ था. वे एक ऐसे परिवार से थे जिसकी कई पीढ़ियां भारतीय सेना से जुड़ी रही. उनके परदादा सिख खालसा सेना में थे, दादा ने प्रथम विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था, और उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल (बाद में ब्रिगेडियर) एम.एल. खेत्रपाल भारतीय सेना के इंजीनियर्स कोर में अधिकारी थे. अरुण शुरू से ही पढ़ाई और खेल दोनों में अव्वल थे. उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में प्रवेश लिया, जहां उन्होंने अपने स्क्वाड्रन का नेतृत्व करते हुए कई प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की. इसके बाद वे इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से ग्रेजुएट हुए और उन्हें 17 पूना हॉर्स बटालियन में कमीशन मिला.
1971 का युद्ध और अरुण की वीरता
जल्द ही 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध छिड़ गया और अरुण की यूनिट को बसरंत नदी के पास भेजा गया. उनका मिशन था दुश्मन के कब्जे वाले इलाके में एक पुल बनाना, जिससे आगे की सेना बढ़ सके. यह काम बेहद मुश्किल था क्योंकि वहां चारों ओर बारूदी सुरंगें बिछी हुई थी. जब उनकी यूनिट को मदद की ज़रूरत पड़ी, तो अरुण खेत्रपाल ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने टैंक के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया. उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर दुश्मन पर जवाबी हमला किया और 10 पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट कर दिया. लेकिन लड़ाई के दौरान उनका टैंक दुश्मन की गोलीबारी की चपेट में आ गया. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, उन्होंने पीछे हटने से इनकार किया और आखिरी सांस तक अपने देश के लिए लड़े. अंत में वे शहीद हो गए, लेकिन अपनी बहादुरी से उन्होंने अमरता पा ली.
देश का सबसे बड़ा वीरता सम्मान
सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया. यह भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है. वे सिर्फ 21 साल की उम्र में इस सम्मान को पाने वाले सबसे युवा अधिकारी बने. उनका नाम आज भी भारतीय सेना की शौर्य गाथाओं में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है.
फिल्म ‘इक्कीस’ से जुड़ी खास बातें
फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं श्रीराम राघवन, जो ‘अंधाधुन’ और ‘बदलापुर’ जैसी बेहतरीन फिल्मों के लिए जाने जाते हैं. अगस्त्य नंदा इस फिल्म के ज़रिए अपने परिवार की फिल्मी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. वे अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के नाती श्वेता बच्चन और निखिल नंदा के बटे हैं. जिन्होंने साल 2023 में ज़ोया अख्तर की फिल्म ‘द आर्चीज़’ डेब्यू किया. वहीं अब इस फिल्म से अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाटिया भी बॉलीवुड में अपना पहला कदम रख रही है. फिल्म की कहानी सच्ची घटनाओं पर आधारित है और इसमें युद्ध के मैदान की भावना, दोस्ती, देशप्रेम और बलिदान की गहराई दिखाई जाएगी.
