दशहरे के मौके पर 2 अक्टूबर को रिलीज हुई कन्नड़ सुपरस्टार ऋषभ शेट्टी की फिल्म ‘कांतारा चैप्टर 1’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर दिया। फिल्म ने पहले दिन ही 61.85 करोड़ रुपए की शानदार ओपनिंग दर्ज की, और केवल दो दिनों में ही 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। पहले हफ्ते में फिल्म ने 337.4 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया। दूसरे वीकेंड में भी दर्शकों की रफ्तार लगातार बढ़ती रही, नौवें दिन 22.25 करोड़, दसवें दिन 39 करोड़ और ग्यारहवें दिन 39.75 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ। दूसरे सोमवार को 8.81 करोड़ का कलेक्शन दर्ज हुआ। कुल मिलाकर, फिल्म का भारत में नेट कलेक्शन 451.90 करोड़ तक पहुंच चुका है।
क्यों कांतारा चैप्टर 1 ने मचाया धूम
‘कांतारा चैप्टर 1’ सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर फिल्म नहीं है, बल्कि एक ऐसी कहानी है जो भारतीय लोक संस्कृति और गाँव के जीवन को सच्चाई के साथ दर्शाती है। इस फिल्म की सफलता का राज़ सिर्फ बॉक्स ऑफिस नंबरों में नहीं, बल्कि इसके सांस्कृतिक प्रामाणिकता, रिलेटेबल किरदार और असली संघर्ष में छिपा है। ऋषभ शेट्टी ने इस फिल्म को लिखने, डायरेक्ट करने और लीड रोल निभाने के साथ ही हर सीन में गाँव के जीवन, प्राकृतिक वातावरण और लोक परंपराओं को भरपूर दिखाया, जो आज की कमर्शियल बॉलीवुड फिल्मों में अक्सर मिसिंग है।
फिल्म की कहानी और सेटिंग से दर्शक तुरंत जुड़ जाते हैं चाहे वो जंगल के गहन रास्ते, किसान की जिंदगी, या लोक कथाएँ हों। रिसर्च और ऑडियंस सर्वेक्षणों ने यह दर्शाया है कि लोग ऐसे कंटेंट के साथ ज्यादा भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं जो उनके अपने या सामाजिक अनुभव से संबंधित हो। ‘कांतारा’ ने इसी प्रिंसिपल का फायदा उठाया और दर्शकों को उनकी संस्कृति और पहचान के साथ जोड़ दिया।
और इसी वजह से, आज भी रिलीज़ के कुछ हफ्ते बाद, लोग थिएटर से निकलते ही फिल्म को दोबारा देखने की योजना बना रहे हैं। फिल्म ने दिखाया कि रियलिज़्म और सांस्कृतिक रूप से जड़ storytelling ही दर्शकों के दिल तक पहुँच सकती है, जबकि कमर्शियल बॉलीवुड फिल्मों में अक्सर सिर्फ ग्लैमर और हाई-बजट स्पेक्ट्रिकल दिखाया जाता है। इस फिल्म की भावनात्मक गहराई और रिलेटेबल संघर्ष ने इसे एक सच्चा ब्लॉकबस्टर और सांस्कृतिक फ़ेनॉमेनन बना दिया है।
बॉलीवुड क्यों नहीं बना सकता ऐसी फिल्म
बॉलीवुड में अक्सर बड़े बजट और हिट formula पर फिल्में बनाई जाती हैं। छोटे बजट, लेकिन मजबूत कहानी, प्रामाणिक अभिनय और सांस्कृतिक संवेदनाओं वाली फिल्मों को बनाने का अवसर कम मिलता है। ‘कांतारा’ की सफलता साबित करती है कि लोक संस्कृति और भावनात्मक जुड़ाव दर्शकों को जोड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है।
