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PMO समेत 12 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के मेल Zoho पर शिफ्ट — जानें पूरी कहानी और वजह

भारत सरकार ने एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है — अब PMO सहित 12 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के ईमेल अकाउंट Zoho प्लेटफ़ॉर्म पर स्थानांतरित किए गए हैं। यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि यह स्वदेशी सॉफ़्टवेयर की दिशा में एक संकेत भी है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि यह कदम क्यों लिया गया, इसके संभावित फायदे और चुनौतियाँ क्या हो सकती हैं, और आम कर्मचारियों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

Zoho क्या है, और सरकार ने क्यों चुना?

Zoho एक भारतीय तकनीकी कंपनी है, जिसे शुरुआत में अमेरिका में स्थापित किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसका मुख्यालय भारत में है। Zoho विभिन्न क्लाउड टूल्स मुहैया कराती है — Zoho Mail, Zoho Sheet, Zoho Show, Zoho Projects आदि — जो माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस और गूगल वर्कस्पेस की तरह ही हैं। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पुराने सिस्टम (NIC द्वारा बनाए गए) अलग-अलग ओपन-सोर्स टूल्स और प्लेटफ़ॉर्म्स पर आधारित थे, जिनमें सुरक्षा कमज़ोर होने की संभावना थी। Zoho का यह दावा है कि वह उपयोगकर्ता डेटा को एक्सेस नहीं करती और न ही उसे बेचती है — इस विश्वास को देखते हुए सरकार ने इसे अपनाना शुरू किया है।

बदलाव की प्रक्रिया और संविदा

— कर्मचारियों के ईमेल डोमेन नाम (जैसे nic.in या gov.in) वही रहेंगे, लेकिन ईमेल होस्टिंग (डेटा स्टोरेज और लेनदेन) अब NIC से Zoho को हस्तांतरित कर दिया गया है।

— सरकार ने 2023 में Zoho के साथ 7 साल की अनुबंध (contract) किया था, ताकि इस संक्रमण को सुगम बनाया जा सके। — Zoho ने यह सुनिश्चित किया है कि उसके पास NIC और CERT-IN जैसी एजेंसियों की सर्टिफिकेशन हो और SQS (सॉफ्टवेयर क्वालिटी सिस्टम) द्वारा नियमित ऑडिट किए जाते हों।

सुरक्षित डेटा और डिजिटल संप्रभुता की दिशा

इस कदम का मकसद केवल एक सॉफ़्टवेयर बदलना नहीं है — बल्कि यह डिजिटल संप्रभुता, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना है। सरकार ने आदेश में कहा:

“भारत सरकार देश की अर्थव्यवस्था को सर्विस इकोनॉमी से प्रोडक्ट में बदलना चाहती है … ज़ोहो के स्वदेशी ऑफ़िस टूल्स को अपनाकर … हम एक आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में कदम उठा रहे हैं।”

सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विदेशी प्लेटफ़ॉर्म्स पर निर्भरता कम हो और संवेदनशील डेटा विदेशी न्यायक्षेत्रों में न जाए।

फायदे (Benefits)

1. सुरक्षा एवं नियंत्रण — डेटा भारत में रहेंगे, और सरकार पर नियंत्रण रहेगा कि कौन डेटा तक पहुँच सके।

2. स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा — यह कदम “Make in India” और “Digital India” अभियानों के अनुरूप है।

3. संगठन में एकरूपता — सभी विभाग एक ही स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म पर होंगे, जिससे प्रबंधन आसान होगा।

संभावित चुनौतियाँ और सवाल

— विश्वसनीयता और निष्पक्षता — यह वादा कि Zoho “यूजर डेटा एक्सेस नहीं करेगी” — यदि बाद में नीति बदलती है तो विवाद हो सकता है।

— उपयोगकर्ता अनुभव — कुछ कर्मचारी पुराने सिस्टम से नए प्लेटफ़ॉर्म में बदलने में असहज हो सकते हैं।

— डेटा माइग्रेशन में तकनीकी खामियाँ — बड़ी संख्या में ईमेल ट्रांज़िशन में डेटा खोने, सिंक्रोनाइज़ेशन या मैपिंग त्रुटियों का डर।

निष्कर्ष

यह कदम सिर्फ एक तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि एक नीतिगत बदलाव है — जिसमें सरकार ने स्वदेशी सॉफ़्टवेयर को संवैधानिक समर्थन दिया है।Zoho के साथ यह अनुबंध और संक्रमण यदि सफल रहा, तो भारत सरकार के डेटा सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में यह मील का पत्थर साबित हो सकता है।लेकिन चुनौतियाँ और चिंता-बिंदु कम नहीं हैं। नियोजन, क्रियान्वयन और निगरानी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

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