तुर्की-पाकिस्तान नजदीकियों से नाराज़ भारत? इंडिगो ने तुर्किश एयरलाइंस से तोड़ी साझेदारी

नई दिल्ली:

दुनिया की सबसे व्यस्त एयरलाइनों में से एक, इंडिगो (IndiGo) ने तुर्की की तुर्किश एयरलाइंस (Turkish Airlines) के साथ अपनी साझेदारी को खत्म करने का फैसला कर लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब तुर्की और पाकिस्तान के बीच रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुँच रहे हैं, और भारत इस बढ़ती नजदीकी को लेकर सतर्क दिखाई दे रहा है।

रिश्ते सिर्फ व्यापारिक नहीं होते !

इंडिगो और तुर्किश एयरलाइंस के बीच यह साझेदारी भारत के यात्रियों के लिए यूरोप और अमेरिका जैसे दूरस्थ स्थानों तक आसान यात्रा का एक विकल्प थी।

कई यात्रियों ने इस कोडशेयरिंग व्यवस्था का लाभ उठाया और इससे इंडिगो ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की। लेकिन व्यापारिक रिश्ते तब कमजोर पड़ने लगते हैं जब राष्ट्रीय भावना बीच में आ जाए।पिछले कुछ वर्षों में तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने पाकिस्तान का खुला समर्थन किया है, खासकर कश्मीर मुद्दे पर। ताजा घटनाक्रम में एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की इस्तांबुल में गर्मजोशी से मुलाकात हुई, जिसमें दोनों देशों ने “भाईचारे” और “अविभाज्य साझेदारी” की बात की। भारत इस घटनाक्रम को हल्के में नहीं ले सकता था।

इंडिगो का फैसला: व्यावसायिक या वैचारिक ?

इंडिगो ने अब तुर्किश एयरलाइंस के साथ अपनी साझेदारी को पूरी तरह खत्म करने का निर्णय ले लिया है। हालांकि अभी यह प्रक्रिया एक अंतिम विस्तार के साथ जारी है, जो 31 अगस्त 2025 तक वैध रहेगा। इसके बाद इंडिगो इस समझौते को आगे नहीं बढ़ाएगी।यह उल्लेखनीय है कि इंडिगो ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से छह महीने का विस्तार मांगा था, लेकिन उसे सिर्फ तीन महीने का ‘अंतिम विस्तार’ मिला है। यह इंगित करता है कि सरकार भी इस फैसले के पीछे खड़ी हो सकती है।

यात्रियों पर क्या असर ?

इस साझेदारी के तहत इंडिगो के यात्रियों को तुर्किश एयरलाइंस के माध्यम से यूरोप और अमेरिका के शहरों तक कनेक्टिविटी मिलती थी। इस फैसले का असर उन यात्रियों पर पड़ सकता है जो सस्ती और सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की उम्मीद करते थे। हालांकि, इंडिगो और सरकार दोनों अब वैकल्पिक मार्ग और साझेदार खोजने में जुट सकते हैं।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं ?

जब से यह खबर सामने आई है, सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने इंडिगो के इस फैसले को ‘राष्ट्रहित’ में बताया है, वहीं कुछ यात्रियों ने चिंता जताई है कि इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सुविधा पर असर पड़ेगा।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “पैसा सब कुछ नहीं होता। इंडिगो ने दिखाया कि जब देशहित की बात आती है, तो समझौते तोड़े भी जा सकते हैं।” वहीं एक अन्य ने कहा, “अब यूरोप जाना मुश्किल हो जाएगा। उम्मीद है इंडिगो जल्द नया विकल्प दे।”

व्यापार में भी भावनाएं होती हैं |

यह मामला सिर्फ दो एयरलाइनों के बीच की साझेदारी का नहीं, बल्कि उन मूल्यों और सिद्धांतों का है जिन पर एक देश चलता है। इंडिगो का यह फैसला दर्शाता है कि भारतीय कंपनियां अब वैश्विक मंच पर राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने लगी हैं।तुर्की-पाकिस्तान की दोस्ती को जवाब देने का यह तरीका भले ही कूटनीतिक न लगे, लेकिन यह निश्चित रूप से संदेश देता है कि भारत अब अपनी शर्तों पर ही रिश्ते बनाएगा – चाहे वो व्यापार में ही क्यों न हो।

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