Baby Health : आजकल बहुत से माता-पिता अपने छोटे बच्चों के लिए, खासकर जन्म से लेकर दो-तीन साल की उम्र तक, डायपर का इस्तेमाल करते हैं. ये डायपर बच्चे का पेशाब सोख लेते हैं और उसे सूखा और आरामदायक रखते हैं. इससे माता-पिता को भी आसानी होती है, क्योंकि बच्चे के कपड़े गीले नहीं होते और रात में नींद भी अच्छी आती है. लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है. उसमें दावा किया गया है कि डायपर बच्चों की किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इस बात से कई माता-पिता बहुत चिंतित हो गए हैं और वे सोचने लगे हैं कि क्या डायपर इस्तेमाल करना सुरक्षित है या नहीं.
इस दावे की सच्चाई जानने के लिए डॉक्टरों से सलाह ली गई. लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में बाल रोग विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शैली अवस्थी ने इस बारे में स्पष्ट जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह दावा बिल्कुल गलत और झूठा है. डायपर का बच्चों की किडनी के कामकाज से कोई सीधा संबंध नहीं होता. किडनी शरीर के अंदर के अंग हैं जो खून को साफ करते हैं और पेशाब बनाते हैं, जबकि डायपर सिर्फ बाहर की चीज हैं जो पेशाब को सोखकर बच्चे को सूखा रखते हैं, इसलिए डायपर से किडनी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.
असली खतरा क्या है? – गंदगी और लापरवाही
डॉ. अवस्थी ने आगे समझाया कि असली समस्या तब पैदा होती है जब डायपर को साफ-सफाई का ध्यान रखकर नहीं बदला जाता. उदाहरण के लिए, डायपर को हर 3 से 4 घंटे में बदलना जरूरी है, खासकर अगर बच्चा पेशाब कर चुका हो. अगर डायपर लंबे समय तक गीला रहता है, तो उसमें नमी और गंदगी जमा हो जाती है. इससे बच्चे की त्वचा पर लाल चकत्ते, जलन या डायपर रैश हो सकता है. यह एक तरह का त्वचा का संक्रमण है जिसे डायपर डर्मेटाइटिस कहते हैं. अगर बार-बार ऐसा होता रहे और मूत्र मार्ग में बैक्टीरिया चले जाएं, तो यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) हो सकता है. यह संक्रमण अगर अनदेखा किया जाए, तो धीरे-धीरे किडनी तक पहुंच सकता है और वहां सूजन या अन्य समस्याएं पैदा कर सकता है. लेकिन ध्यान दें – यह नुकसान डायपर की वजह से नहीं, बल्कि खराब स्वच्छता और लापरवाही की वजह से होता है. डायपर खुद इसमें दोषी नहीं हैं.
माता-पिता के लिए आसान और उपयोगी सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि डायपर इस्तेमाल करना पूरी तरह सुरक्षित है, बशर्ते आप कुछ नियमों का पालन करें. ये सुझाव आपके बच्चे को स्वस्थ और खुश रखने में बहुत मदद करेंगे:
- डायपर बदलने से पहले सफाई जरूरी: नया डायपर पहनाने से पहले बच्चे के प्राइवेट पार्ट्स को सादे पानी से धोएं या अच्छी क्वालिटी के बेबी वाइप्स से साफ करें। इससे गंदगी और बैक्टीरिया हट जाते हैं.
- रैश से बचाव के लिए क्रीम लगाएं: अगर बच्चे की त्वचा संवेदनशील है या रैश की शिकायत रहती है, तो डॉक्टर की सलाह से जिंक ऑक्साइड वाली बेबी रैश क्रीम या सादा नारियल तेल लगा सकते हैं. यह त्वचा को नमी से बचाता है.
- अच्छी क्वालिटी के डायपर चुनें: हमेशा मुलायम, हवा पास करने वाले (ब्रीदेबल) और हाइपोएलर्जेनिक डायपर इस्तेमाल करें. ये त्वचा को जलन से बचाते हैं और बच्चे को आराम देते हैं. सस्ते या खराब ब्रांड से बचें.
- कपड़े के नैपी का विकल्प: अगर आप डायपर नहीं इस्तेमाल करना चाहते, तो साफ-सुथरे सूती कपड़े के नैपी यूज कर सकते हैं. इन्हें हर बार धोकर सुखाएं और इस्तेमाल करें. लेकिन रात में अगर बच्चा ज्यादा पेशाब करता है, तो डायपर ज्यादा सुविधाजनक होता है। बस सुबह उठते ही तुरंत बदल दें.
- रात का खास ध्यान: रात में डायपर लगाना ठीक है, लेकिन सुबह सबसे पहले चेक करें और बदलें. लंबे समय तक गीला डायपर न रहने दें.
ये भी पढ़ें : 5 रुपये में केसर? Salman Khan को पान मसाला ऐड के लिए को कोर्ट से नोटिस
छोटे बच्चों में यूटीआई कैसे पहचानें?
बड़ों की तरह शिशु बताकर नहीं बता सकते कि उन्हें दर्द हो रहा है. इसलिए उनके लक्षण अलग-अलग होते हैं. अगर बच्चे में ये संकेत दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- बिना वजह तेज बुखार आना
- बच्चा चिड़चिड़ा रहना, रोना या असहज महसूस करना
- दूध या खाना ठीक से न पीना
- पेशाब से बदबू आना या रंग गहरा होना
ये यूटीआई के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. अगर इलाज न किया जाए, तो संक्रमण किडनी तक पहुंचकर पाइलोनफ्राइटिस जैसी गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि ये संक्रमण ज्यादातर बैक्टीरिया की वजह से होते हैं जो गंदगी से मूत्र मार्ग में घुस जाते हैं – डायपर से नहीं.
रोकथाम के आसान उपाय
- डायपर बदलते समय लड़कियों के प्राइवेट पार्ट्स को आगे से पीछे की ओर साफ करें, क्योंकि लड़कियां यूटीआई की ज्यादा शिकार होती हैं
- बच्चे को दिन में पर्याप्त पानी या दूध पिलाएं ताकि वह हाइड्रेटेड रहे
- कोई भी लक्षण दिखे तो देर न करें, डॉक्टर को दिखाएं
