नई दिल्ली: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। इस परियोजना का उद्देश्य दोनों शहरों के बीच यात्रा समय को घटाकर लगभग 2 घंटे 7 मिनट करना है, जो वर्तमान में 7 से 8 घंटे है। यह परियोजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी बल्कि गुजरात और महाराष्ट्र के औद्योगिक और वित्तीय विकास को भी बढ़ावा देगी।
बुलेट ट्रेन परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
- लंबाई और मार्ग: यह रेल कॉरिडोर 508 किलोमीटर लंबा होगा, जो महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों से होकर गुजरेगा। इसमें कुल 12 स्टेशन होंगे: मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद, और साबरमती।
- गति और समय: बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 320 किमी/घंटा होगी, जिससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय में महत्वपूर्ण कमी आएगी। इससे दैनिक यात्रियों और व्यवसायिक यात्रियों को काफी फायदा होगा।
- निर्माण की स्थिति: परियोजना की प्रगति 47% तक पहुँच चुकी है। वर्तमान में सूरत और बिलिमोरा स्टेशनों पर छत की छतरी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण जारी है। रेलवे ट्रैक्स और सुरंगें भी तेजी से बन रही हैं, जिससे समय पर संचालन और सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके।
बुलेट ट्रेन की वित्तीय विवरण
इस परियोजना की कुल लागत लगभग ₹1.08 लाख करोड़ है। इसमें से 81% (₹88,000 करोड़) जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) द्वारा 0.1% ब्याज दर पर 50 वर्षों के लिए ऋण के रूप में प्रदान किया गया है। शेष 19% (₹20,000 करोड़) की लागत भारतीय रेलवे मंत्रालय और महाराष्ट्र तथा गुजरात सरकारों द्वारा साझा की जाएगी। जापान और भारत के बीच यह तकनीक और आर्थिक सहयोग का एक आदर्श उदाहरण है।
प्रमुख स्टेशन और सुविधाएँ
- साबरमती स्टेशन: यह स्टेशन महात्मा गांधी के ‘चर्खा’ से प्रेरित वास्तुकला में बनाया जा रहा है। यहाँ पर यात्री सुविधाओं जैसे प्रतीक्षालय, शौचालय, नर्सरी, और वाणिज्यिक स्थलों का निर्माण किया जा रहा है।
- ठाणे स्टेशन: यह स्टेशन एक प्रमुख परिवहन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें मेट्रो और उपनगरीय रेलवे नेटवर्क के साथ बेहतर कनेक्टिविटी होगी।
- सूरत और बिलिमोरा स्टेशन: यहाँ पर पैसेंजर सुविधाएँ और मेंटेनेंस डिपो का निर्माण हो रहा है, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
तकनीक और सुरक्षा फीचर्स
बुलेट ट्रेन में हाई-स्पीड सिग्नलिंग सिस्टम, भूकंप-प्रतिरोधी संरचनाएँ, और एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम लगे हुए हैं। इससे सुरक्षा के साथ-साथ संचालन की समयबद्धता सुनिश्चित होती है। एनर्जी-एफिशिएंट सिस्टम और साउंड बैरियर्स भी लगाए गए हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल संचालन में मदद करते हैं।
ट्रायल रन और उद्घाटन
परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन 2026 में गुजरात के सूरत से किया जाएगा। इसके बाद, 2028 में ठाणे और 2029 में मुंबई तक सेवा विस्तारित की जाएगी। यात्रा की गति और आधुनिक सुविधाओं से यात्रियों का सफर आसान और आरामदायक बनेगा।
