हैट्रिक पर गोल्ड, चांदी भी बेकाबू – जानिए क्या है इसके पीछे का राज़.

सोना-चांदी का जलवा: हैट्रिक पर गोल्ड, बेकाबू हुई सिल्वर – जानिए क्यों मचा है बाजार में तूफान

हाल ही में सोने और चांदी की कीमतों में ऐसी तेज़ी देखने को मिली है जिसने निवेशकों, व्यापारियों और आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। गोल्ड ने कीमतों के लिहाज से ‘हैट्रिक’ मार दी है — यानी लगातार तीसरे हफ्ते इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, चांदी ने तो और भी ज्यादा रफ्तार पकड़ ली है, और एक ही सप्ताह में भारी उछाल के साथ रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है। आखिर क्या हैं इसके पीछे के कारण? और निवेशकों को इस समय क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

सोने-चांदी की मौजूदा स्थिति –

2025 के जून के पहले हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें $2,400 प्रति औंस के पास पहुँच गई हैं। वहीं भारतीय बाजार में 10 ग्राम गोल्ड की कीमत 74,000 रुपये के पार निकल गई है, जो अब तक का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर है। चांदी ने तो और भी चौंका दिया है — इसकी कीमत 96,000 रुपये प्रति किलो तक जा पहुँची है, और जल्द ही 1 लाख रुपये का आंकड़ा पार करने की उम्मीद जताई जा रही है।कीमतों में इस उछाल की बड़ी वजहें

1. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता

दुनिया भर में आर्थिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। अमेरिका और यूरोप में महंगाई दर अभी भी अपेक्षित स्तरों से ऊपर है, वहीं चीन में आर्थिक सुस्ती बरकरार है। ऐसे में निवेशक पारंपरिक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं — और गोल्ड-सिल्वर इसमें सबसे ऊपर हैं।

2. फेडरल रिजर्व की नीतियां –

अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कटौती के संकेत दिए हैं, जिससे डॉलर कमजोर हो रहा है और सोने-चांदी की मांग बढ़ रही है। चूंकि गोल्ड एक डॉलर-समर्थित संपत्ति है, डॉलर में कमजोरी आने पर इसकी कीमत आम तौर पर ऊपर जाती है।

3. बढ़ती जियोपॉलिटिकल टेंशन –

रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट में तनाव और ताइवान को लेकर अमेरिका-चीन के बीच खिंचाव जैसे घटनाक्रमों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। ऐसे समय में सोना एक सुरक्षित पनाहगाह की तरह काम करता है।

4. डिमांड और सप्लाई का असंतुलन

वैश्विक स्तर पर चांदी की माइनिंग में गिरावट आई है जबकि इंडस्ट्रियल और ग्रीन एनर्जी सेक्टर से डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर पैनल निर्माण में चांदी की अहम भूमिका है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

चांदी क्यों दिखा रही है ज्यादा रफ्तार?

जहाँ सोना पारंपरिक निवेश का जरिया है, वहीं चांदी अब इंडस्ट्रियल मेटल के रूप में भी उभर रही है। दुनिया में तेजी से बढ़ते ग्रीन एनर्जी ट्रेंड के चलते चांदी की डिमांड और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चांदी का मूल्यवर्धन सोने से भी ज्यादा हो सकता है।क्या निवेशकों को अभी सोना-चांदी खरीदना चाहिए?यह सवाल अब हर निवेशक के मन में है। अगर आप लॉन्ग-टर्म निवेशक हैं, तो यह अभी भी एक अच्छा समय हो सकता है। लेकिन छोटी अवधि के लिए ट्रेडिंग करने वालों को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि बहुत तेजी के बाद मुनाफावसूली का दौर भी आ सकता है।

सोने और चांदी की कीमतों में जो तूफानी तेजी देखने को मिल रही है, वह सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों से भी प्रेरित है। ऐसे में यह समय सतर्क और रणनीतिक निवेश का है। जहां एक ओर इनकी कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना है, वहीं बाजार में कभी भी करेक्शन (गिरावट) आ सकती है।अगर आप सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश में हैं, तो सोना और चांदी आपके पोर्टफोलियो में शामिल होने लायक हैं — बशर्ते आप लॉन्ग-टर्म सोच के साथ प्लान करें।

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